नज़्म________तुम खफ़ा मत होना..….

राह चलते कभी मैं तुमसे
अजनबी गर हो जायूँ तो
तुम खफ़ा मत होना।
मैं हर किसी को तुम्हारा 
परिचय नहीं दे सकता।
तुम्हें महफूज़ रखना है,
मेरी हर परेशानियों से।
किस के दिल में क्या है
मैं तो जान नहीं सकता।
हर दिल यहाँ नेक ही हो
ये भी मान नहीं सकता।
मुझे तुम से प्यार है तो है
नुमाइश  कर नहीं सकता।
वक़्त का तकाजा समझो
सदा साथ हो नहीं सकता।
खो जायूँ मैं खुद को चलेगा
तुम्हें कभी खो नहीं सकता।
राह चलते कभी मैं तुमसे
अजनबी गर हो जायूँ तो
तुम खफ़ा मत होना sss
तुम खफ़ा मत होना sss
तुम खफ़ा मत होना sss
    
                    ___Ajay K. C. Mungeri
                               18/09/21

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